सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में दिल दहला देने वाले दोहरे हत्याकांड में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी नाबालिग पुत्री की नृशंस हत्या के मामले में तीन मुख्य आरोपियों को मृत्युदंड (फांसी) तथा एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साक्ष्यों और त्वरित विवेचना के आधार पर फैसला
सूरजपुर थाने में दर्ज इस जघन्य हत्याकांड की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक विमलेश दुबे द्वारा की गई थी। पुलिस ने तत्परता से आरोपियों को गिरफ्तार कर तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट, आर्म्स एक्ट और छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं में अदालत में चालान पेश किया था। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार शर्मा ने की।
अदालत का फैसला: अपराध सिद्ध होने पर कठोर दंड
प्रकरण की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) श्री आनंद प्रकाश वारियाल के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने समग्र तथ्यों, परिस्थितियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए चारों आरोपियों को दोषी करार दिया और निम्नलिखित सजा मुकर्रर की:
- कुलदीप साहू (25 वर्ष): धारा 103(1), 3(5) BNS के तहत मृत्युदंड (फांसी) और ₹25,000 जुर्माना। धारा 70(1) BNS में मृत्यु पर्यंत कारावास और ₹20,000 जुर्माना। इसके अलावा अन्य गंभीर धाराओं एवं राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आजीवन कारावास और कठोर कारावास की सजा।
- फुल सिंह उर्फ रिंकू (28 वर्ष): धारा 103(1), 3(5) BNS में मृत्युदंड और ₹25,000 जुर्माना। धारा 70(1) में मृत्यु पर्यंत कारावास सहित अन्य धाराओं में आजीवन कारावास व अर्थदंड।
- चन्द्रकांत चौधरी (28 वर्ष): धारा 103(1), 3(5) BNS में मृत्युदंड और ₹25,000 जुर्माना। धारा 70(1) में मृत्यु पर्यंत कारावास सहित अन्य धाराओं में आजीवन कारावास व अर्थदंड।
- आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा (20 वर्ष): धारा 103(1), 3(5) BNS में आजीवन कारावास और ₹20,000 जुर्माना। साथ ही धारा 331(8), 61(2) और 238(A) BNS के तहत आजीवन कारावास व अन्य कठोर सजाएं सुनाई गईं।
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