शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता : कलेक्टर रेना जमील

Chattisgarh News Surajpur

शाला प्रवेशोत्सव, स्कूलों की व्यवस्थाओं, छात्रावासों एवं आदिवासी विकास विभाग की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा

सूरजपुर/16 जुलाई 2026/ कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने जिले में शाला प्रवेशोत्सव, शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूलों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं तथा आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक में कलेक्टर ने शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की वीएसके (VSK) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति तथा विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने शिक्षकों की नियमित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करवाने के निर्देश दिए। साथ ही जिन विद्यालयों में वीएसके ऐप में तकनीकी समस्या आ रही है, वहां पुनः लोकेशन मैपिंग कर समस्या का शीघ्र समाधान करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों को दिए।
साथ ही संकुल समन्वयकों को भी शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने तथा शिक्षकों को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निरंतर प्रयास करने को कहा।

कलेक्टर ने विद्यार्थियों को शत-प्रतिशत पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित करने, बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने के लिए शिक्षकों द्वारा अभिभावकों की काउंसलिंग करने तथा विद्यालयों में न्योता भोज का नियमित आयोजन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ने, बच्चों की बेसिक नॉलेज मजबूत करने, स्कूलों के क्लस्टर बनाकर शैक्षणिक एवं खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने तथा नवाचारों के माध्यम से शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। साथ ही विद्यालयों की छोटी-बड़ी सभी समस्याओं की जानकारी तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बैठक में विद्यालय भवनों के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने नवीन भवनों का निर्माण शीघ्र पूरा करने तथा मरम्मत योग्य भवनों का प्राथमिकता के आधार पर सुधार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने आवश्यकतानुसार नए भवनों की मांग का प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। विद्यालयों एवं छात्रावासों में शौचालयों की उपलब्धता, उनकी साफ-सफाई एवं उपयोगिता की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जहां शौचालय नहीं हैं या पर्याप्त संख्या में नहीं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कराया जाए। जिन विद्यालयों में शौचालय उपयोग योग्य नहीं पाए जाएंगे, वहां संबंधित प्राचार्य के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। स्वच्छता एवं शौचालय उपयोग के प्रति सिविक सेंस विकसित करने के लिए भी शिक्षा विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने विद्यालयों या छात्रावासों में पेयजल, बिजली एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि जहां सोलर आधारित बिजली व्यवस्था स्थापित है, वहां किसी भी प्रकार की खराबी आने पर तत्काल सूचना देकर मरम्मत कराई जाए। जिन विद्यालयों में बिजली व्यवस्था उपलब्ध नहीं है या बाधित है, वहां की रिपोर्ट तैयार कर क्रेडा विभाग के समन्वय से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बीईओ एवं बीआरसी को नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए।

आदिवासी विकास विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने देवगुड़ी निर्माण, छात्रावासों में आवश्यक सुविधाओं, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की प्रगति तथा छात्रावासों की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि छात्रावासों में किचन, बेड, दरवाजे, खिड़कियां एवं भवनों की स्थिति बेहतर रखी जाए तथा पानी के रिसाव जैसी समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाए। वर्षा ऋतु को देखते हुए छात्रावासों एवं विद्यालयों के भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, जर्जर भवनों का उपयोग पूरी तरह बंद रखने तथा बच्चों की सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने छात्रावासों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने, मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए बच्चों को जागरूक करने, अधीक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शिक्षकों एवं छात्रावास अधीक्षकों द्वारा शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही अथवा शराब सेवन की शिकायत मिलने पर तत्काल कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विद्यालयों एवं छात्रावासों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने तथा खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक संसाधनों की जानकारी लेकर सुविधाएं विकसित करने को कहा।

बैठक में उल्लास कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने जिले में संचालित साक्षरता गतिविधियों एवं उल्लास केंद्रों की जानकारी लेते हुए कहा कि बेहतर शिक्षित समाज के निर्माण के लिए स्कूली बच्चों को स्वयंसेवक के रूप में जोड़कर वरिष्ठ नागरिकों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने बच्चों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने तथा उन्हें विभिन्न जनहितकारी गतिविधियों में स्वैच्छिक रूप से भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

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