पीएमश्री सेजेस बतरा में गूंज रहा है मंत्रोच्चार, शिक्षा और संस्कार का अद्भुत संगम

Chattisgarh News Surajpur

पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बतरा विकास खण्ड भैयाथान जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़, आज केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, अनुशासन और नवाचार का प्रेरणादायी केंद्र बनकर उभर रहा है। विद्यालय परिसर इन दिनों वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान है, जिससे विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा, एकाग्रता, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो रहा है।

विद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखते हुए ज्ञान, विज्ञान, कला, खेल, नवाचार और संस्कार का अनूठा समन्वय किया जा रहा है। एक ओर छात्र-छात्राएँ आधुनिक विज्ञान, तकनीकी शिक्षा एवं नवाचार गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय परंपरा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से भी उनका सशक्त परिचय कराया जा रहा है।

विद्यालय के प्राचार्य श्री गोवर्धन सिंह ने कहा कि “उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम प्राप्त करना हमारी प्राथमिकता है, परंतु इसके साथ-साथ शासन एवं प्रशासन द्वारा जारी प्रत्येक निर्देश, योजना और आदेश का पूर्ण निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ पालन करना हमारा प्रथम कर्तव्य है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संस्कारित और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाले नागरिक तैयार करना है।”

उन्होंने आगे कहा कि पीएमश्री सेजेस बतरा लगातार उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम, अनुशासित शैक्षणिक वातावरण, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। विद्यालय में नियमित रूप से प्रार्थना, योग, मंत्रोच्चार, खेल, स्काउट गाइड गतिविधियाँ, विज्ञान प्रयोग, कला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिससे विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को नई दिशा मिल रही है।

विद्यालय परिवार का मानना है कि “जहाँ ज्ञान के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ मूल्य और शिक्षा के साथ संस्कृति का समन्वय होता है, वहीं से उत्कृष्ट समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है।”

आज पीएमश्री सेजेस बतरा शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करते हुए यह संदेश दे रहा है कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति का समन्वय ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। विद्यालय परिसर में गूंजता मंत्रोच्चार इसी सकारात्मक परिवर्तन, आध्यात्मिक चेतना और उत्कृष्ट शिक्षा का प्रतीक बन गया है।

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