कसकेला पंचायत में बिना जीएसटी के बिल का हो रहा भुगतान

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*बिल में सरपंच के हस्ताक्षर और सील सवालों के घेरे में*

*बाजार की कीमत  से बढ़कर सामग्री उपलब्ध करा रहा है सप्लायर*

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सूरजपुर – छ. ग. प्रदेश में सरकार द्वारा जहाँ एक ओर पंचायतों को विकसित और सुंदर बनाने के लिए आयदिन तरह – तरह की योजनाएं लागू की जा रही हैं

वहीं पंचायत प्रतिनिधि एवं सचिव सहित सप्लायर की मिलीभगत ने सरकार की मंशा पर पलीता लगा दिया है l अनाप – सनाप बिलिंग और उसपर सरपंच सचिव की सहमति से कई सवाल उठना लाजमी है l जी हाँ हम बात कर रहे हैं सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत कसकेला की l जहां शासकीय मद का दुरुपयोग बेखौफ होकर की जाने की बात निकलकर सामने आ रही है l दरसल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला बीते वर्ष 2025 का है जब पंचायत अंतर्गत आने वाले भवनों में शौचालय जैसे भवन के मरम्मत सहित रंगरोगन का कार्य कराया गया था l हालांकि इस कार्य की गुणवत्ता और पूर्णता कैसी रही रही ये तो बीते दिनों की बात है l लेकिन गौरतब है कि उपरोक्त कार्यों के लिए पंचायत द्वारा क्रय की सामग्री की कीमत और सामग्री उपलब्ध कराने वाले ट्रेडर्स पर कई सवाल उठने लगे हैं l पंचायत में जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराने वाले पावले ट्रेडर्स ने सामग्री का जो बिल जमा किया गया है प्रथम दृष्टया वह संदेहास्पद प्रतीत हो रहा है l उस बिल में ट्रेडर्स के संचालक संतोष पावले का हस्ताक्षर और कसकेला सरपंच का सील और हस्ताक्षर तो है लेकिन उस बिल में कहीं भी जीएसटी नंबर या टिन नंबर का उल्लेख नहीं है l इधर विभागीय सूत्रों ने बताया कि रामनगर स्थित पावले ट्रेडर्स का कोई जीएसटी नंबर नहीं है l हैरत की बात तो यह है कि इस फर्म के द्वारा बीते कई वर्षों से बालू, सीमेंट,ईंट, गिट्टी, मिट्टी, सरिया छड़, खिड़की, दरवाजा पेंट,चुना आदि का व्यवसाय बेधड़क रूप से किया जा रहा है l ऐसे में इस फर्म का जीएसटी नंबर का न होना अपने आप में संदेहास्पद है l और तो और सब कुछ जानते हुए भी पंचायत सचिव और सरपंच द्वारा ऐसे ट्रेडर्स का चयन कर सामग्री क्रय करना फिर विभाग के पोर्टल में कच्चा बिल को प्रमाणित कर जमा करना भ्रष्टाचार के संदेह को बढ़ावा देता है l

वहीं दूसरी ओर जानकारों का मानना है कि ट्रेडर्स द्वारा बिल में दर्शाए गए कुछ सामग्री की कीमत तत्कालीन बाजार की कीमत से अधिक है जो कहीं न कहीं भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की इशारा करता है l बता दें कि कुछ जागरूक ग्रामीणों द्वारा इस पूरे मामले की विभागीय जांच कराने की तैयारी की जा रही है l

वहीं अगर ग्राम पंचायत सरपंच की बात करें तो ग्रामीणों ने बताया कि आज सोशल मीडिया के दौर में भी सरपंच श्रीमती यशोदा स्वयं मोबाइल नहीं रखती हैं और जो मोबाइल नंबर पंचायत सहित स्थानीय ग्रामीणों को दे रखी है उस नम्बर के मोबाइल को प्रायः उनके पति रखते हैं जो एक एसईसीएल कर्मचारी हैं और समय पर फोन नहीं उठाते हैं l ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच से बात और मुलाकात न होने से हमारी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता l

हालांकि मामले की आधिकारिक पुष्टि हम नहीं करते क्योंकि यह मामला सरपंच और ग्रामीणों के बीच का व्यक्तिगत भी हो सकता है l

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