प्रशासन की सजगता से रुके दो बाल विवाह, बालिका को सखी वन स्टॉप सेंटर में दिया गया आश्रय

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– बिना दुल्हन लिए लौट गई बारात, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्यवाही की दी गई चेतावनी

सूरजपुर/ जिला कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के निर्देश पर सूरजपुर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी निचले स्तर पर सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। गांव-गांव में हो रहे विवाहों की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है तथा जहां भी बाल विवाह की सूचना प्राप्त होती है, वहां तत्काल महिला एवं बाल विकास विभाग एवं जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम को सूचित किया जाता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री शुभम बंसल के मार्गदर्शन एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल के नेतृत्व में जिले में टीम सक्रियता से कार्य कर रही है।

पहला प्रकरण – प्रतापपुर में रोका गया नाबालिग बालक का विवाह:-
पहला प्रकरण विकासखण्ड प्रतापपुर का है, जहां से 18 वर्ष से कम आयु के बालक की बारात बलरामपुर जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही रात्रि में टीम बालक के घर पहुंची एवं परिजनों एवं बारातियों को अवगत कराया कि यदि विवाह सम्पन्न होता है तो समस्त बारातियों के विरुद्ध बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्यवाही की जाएगी तथा सभी को जेल जाना पड़ सकता है। इसी के साथ बलरामपुर जिले में भी सम्पर्क किया गया, जहां पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए बारात को वापस कर दिया तथा दूल्हे को बिना दुल्हन के लौटना पड़ा। बाद में मौके पर पड़ताल कर पंचनामा तैयार किया गया तथा परिजनों से विवाह न करने का पंचनामा कथन लिया गया।

दूसरा प्रकरण – भैयाथान में 17 वर्षीय बालिका का विवाह रुकवाया गया:-
दूसरे प्रकरण में विकासखण्ड भैयाथान के एक गांव में 17 वर्षीय बालिका का विवाह कराए जाने की सूचना प्राप्त होने पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल एवं परियोजना अधिकारी श्री नितेन बेहरा के साथ संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। वहां बालिका के माता-पिता बालिका को अनपढ़ बताते हुए उसकी आयु विवाह योग्य होने की बात कह रहे थे। सूचना के आधार पर संबंधित स्कूल से दाखिल-खारिज का प्रमाण प्रस्तुत किया गया, जिसमें बालिका की आयु 17 वर्ष पाई गई। टीम द्वारा बार-बार समझाने के बावजूद परिजन विवाह कराने की जिद पर अड़े रहे। मजबूरी में पंचायत के सरपंच, पर्यवेक्षक एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों के समक्ष पंचनामा तैयार कर बालिका को सखी वन स्टॉप सेंटर लाया गया। बालिका के संबंध में बाल कल्याण समिति को अवगत कराकर उसे सखी वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित आश्रय प्रदान किया गया।

कार्यवाही में सम्मिलित अधिकारी एवं कर्मचारी:-
बाल विवाह रुकवाने की कार्यवाही में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल के अतिरिक्त परियोजना अधिकारी श्री नितेन बेहरा, प्रभारी परियोजना अधिकारी प्रतापपुर श्रीमती संतोषी सिंह, पर्यवेक्षक श्रीमती सूरजमति बघेल, पर्यवेक्षक श्रीमती शीला वर्मा, चाइल्ड हेल्पलाइन से श्री जनार्दन यादव, श्री प्रकाश राजवाड़े, कु. रीता सिंह तथा पुलिस विभाग से प्रतापपुर थाना एवं बसदेई चौकी के स्टाफ की सक्रिय भूमिका रही।

आमजन से अपील:-
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तत्काल महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचित करें, जिससे मासूम बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखा जा सके। बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है तथा कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है।

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