बिलासपुर प्रेस क्लब का शपथ कही अपील के निर्णय को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं?

Chattisgarh News Surajpur

बिलासपुर प्रेस क्लब का चुनावी विवाद अभी थमा नहीं फिर भी उपमुख्यमंत्री अरुण साव शपथ करायेंगे?

26 जनवरी को मुख्यमंत्री ने भी समय दिया था लेकिन वस्तु स्थिति को देखते हुये उन्होंने उस दिन शपथ नहीं कराया?

बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनाव को पंजीयक द्वारा रद्द किये जाने पर एक पक्ष हाईकोर्ट गया था?

हाईकोर्ट ने प्रेस क्लब मामले में अपील में जाने की हिदायत दी जिसको एक पक्ष मामले को अपील में लेकर भी गया जल्द निर्णय आने के संकेत हैं।

बिलासपुर :- बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनावी विवाद में शपथ ग्रहण समारोह को लेकर सियासी और कानूनी घमासान तेज हो गया है। 19 सितंबर 2025 को लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुए क्लब चुनाव में आशीर्वाद पैनल के दिलीप यादव अध्यक्ष, गोपीनाथ डे उपाध्यक्ष, लोकेश्वर बाघमारे कोषाध्यक्ष और रमेश राजपूत सहसचिव निर्वाचित हुए थे, जबकि संदीप करिहार सचिव और कैलाश यादव कार्यकारिणी सदस्य के रूप में चुने गए।
हालांकि चुनाव के दौरान अजीत मिश्रा और दिलीप अग्रवाल सहित दो अन्य उम्मीदवारों ने मतदाता सूची में त्रुटियों और आपत्तियों की लिखित शिकायतें की थीं। आरोप है कि उन्होंने स्वयं से जुड़े सदस्यों से वोट मांगने की कोशिश भी की। चुनाव हारने के बाद इन उम्मीदवारों की शिकायतें सहायक पंजीयक ज्ञान पी साहू के पास पहुंचीं, लेकिन कोई जांच नहीं की गई। इसके बावजूद सहायक पंजीयक ने चुनाव अधिकारी को नोटिस जारी किया, लेकिन निर्वाचित पदाधिकारियों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया। बाद में रायपुर स्थित रजिस्ट्रार पद्मिनी भोई साहू को इन शिकायतों की कॉपी भेजी गई, जिनके आधार पर रजिस्ट्रार ने 18 नवंबर 2025 को बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनाव को रद्द कर दिया। चुनाव रद्द करने के छह दिन बाद, 24 नवंबर 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
निर्वाचित अध्यक्ष दिलीप यादव ने रजिस्ट्रार के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने पहले शासन के पास अपील का रास्ता दिया और वर्तमान में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ अपील विचाराधीन है। इस बीच, विवादित आदेश के आधार पर कराए गए चुनाव में निर्वाचित पदाधिकारियों ने 26 जनवरी 2026 को शपथ ग्रहण समारोह प्रस्तावित किया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आमंत्रित किया गया, लेकिन विवाद और कानूनी प्रक्रिया की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने कार्यक्रम से दूरी बनाकर रखा।
अब उसी विवादित चुनाव में निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाने के लिए 20 फरवरी को शहर के एक निजी होटल में डिप्टी सीएम अरुण साव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले हैं। इस खबर के बाद क्लब के अधिकांश सदस्यों में चर्चा और मतभेद बढ़ गए हैं? कई लोग इसे अपील प्रकरण को प्रभावित करने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि जब अपील लंबित है तो विवादित शपथ ग्रहण समारोह से दूर रहना ही उपयुक्त रहेगा।
क्लब के विवादित चुनाव के संदर्भ में अपील में तर्क दिया गया है कि रजिस्ट्रार का आदेश बिना किसी सुनवाई के, बिना निर्वाचित पदाधिकारियों को नोटिस दिए और जांच किए जारी किया गया, जो स्पष्ट रूप से नियम और संविधान के तहत अधिकार क्षेत्र से बाहर (ultra vires) माना जा सकता है। कहा जा रहा है कि बिना वैध प्रक्रिया के शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित करना अपील प्रकरण और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अपील विचाराधीन है, विवादित चुनाव के निर्वाचित पदाधिकारी शपथ ग्रहण या समारोह आयोजित करने में सतर्कता बरतें। विशेष रूप से, कोई उच्च पदाधिकारी जैसे डिप्टी सीएम शामिल हों, तो यह न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक तटस्थता पर असर डाल सकता है। ऐसे में शपथ ग्रहण समारोह में किसी भी मुख्य अतिथि का शामिल होना विवाद और कानूनी सवालों को बढ़ा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *