जनजातिय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का शासकीय महाविद्यालय सिलफिली में हुआ आयोजन

Chattisgarh News Surajpur

सूरजपुर- महाविद्यालय सिलफिली , जिला सूरजपुर में जनजातिय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य श्री अमित सिंह बनाफर की अध्यक्षता में कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं वक्ता श्रीमती स्वाती सिंह जनपद पंचायत अध्यक्ष सूरजपुर रही। कार्यक्रम का संचालन एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी एवं कार्यक्रम संयोजक श्रीमती शालिनी शांता कुजूर के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, छत्तीसगढ़ महतारी, जननायक नायिकाओं के छायाचित्र पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्वलन द्वारा किया गया है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गान किया गया । अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ के द्वारा किया गया। स्वागत के अगली कड़ी में संस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया गया। मुख्य वक्ता स्वाती सिंह ने अपने उद्बोधन में भारत के जनजातीय समाज के वीर नायक नायिकाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताया कि उनकी आध्यात्मिक परंपराओं, विशिष्ट संस्कृति और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के साथ सदैव से ही भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग रहे हैं। देश में जब भी सुरक्षा पर संकट आई जनवासी समाज ने हमेशा से ही अपने शौर्य और बलिदान से राष्ट्र की रक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अंग्रेजों ने जब भारत में अपना साम्राज्य का विस्तार किया , उस समय प्रारंभिक और सशक्त चुनौती वनांचलों से ही मिलना प्रारंभ हुआ। जनजाति समाज ने कभी भी अंग्रेजों की दास्तान स्वीकार नहीं की और समय-समय पर सशस्त्र विद्रोह और संघर्ष किया। तिलक मांझी, बुधु भगत , सिदो -कान्हू, टंट्या भील, भीमा नायक ,वीर नारायण सिंह, रामजी गॉड ,भगवान बिरसा मुंडा, अल्लूरी सीताराम राजू , कोमराम भीम ,फूला झानों, रानी दुर्गावती आदि वीर नायक, नायिकाओं ने अपना योगदान देश , समाज हित में दिया। इनके जीवन परिचय विस्तार पूर्वक उन्होंने बताया। कार्यक्रम की सहसंयोजक श्रीमती अंजना सहायक अध्यापक अंग्रेजी में जनजाति समाज की जीवन शैली उनकी सरलता, सहजता कार्य कुशलता परिश्रमी ,सहयोग की भावना के बारे में बताया। जनजातीय समाज प्रकृति पूजक हैं। जल, जंगल , जमीन की सदैव से रक्षा करते आ रहे हैं उन्हें बिना नुकसान पहुंचाये, उनका उपयोग करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। जनजातियों के सामाजिक एवं आध्यात्मिक परिपेक्ष में जानकारी दी। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महाविद्यालय छात्र छात्राए, प्राध्यापक डॉ. प्रेमलता एक्का, डॉ. अजय कुमार तिवारी ,श्री आशीष कौशिक, श्री जफीर , श्री राहुल, श्रीमती सुनीता गुप्ता, श्री अशोक राजवाड़े, श्री ताराचंद्र साहू, श्री दिनेश लकड़ा, श्री हेमंत नाविक, श्री जय कुमार की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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