बालिका सुरक्षा माह के तहत जिले में बाल संरक्षण और बाल विवाह रोकथाम की दिशा में चलाया जा रहा है ठोस पहल

Chattisgarh Surajpur

सूरजपुर/vicg.24…/ शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के चुनिंदा विद्यालयों में बालिका सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रम बालिका सुरक्षा माह 19 अगस्त से 15 सितंबर तक कराया जा रहा है इसके तहत स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम कराए जा रहे हैं

सूरजपुर जिले के सभी ग्राम पंचायत में बाल संरक्षण समिति का गठन किया चुका है और जो ग्राम पंचायत स्तर पर गठित बाल संरक्षण समिति का गठन किया गया है उनका मुख्य कार्य 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपराध से बचाना है एवं उनको शिक्षा से जोडना है

आज परियोजना सिलफिली के शा.उ.मा.वि. लटोरी की पर्यवेक्षक विजेता पाण्डेय विकासखण्ड भैयाथान में शा.क.उ.मा.वि. मे पर्यवेक्षक तदा चौधरी, वि.ख. रामानुजनगर में शा.उ.मा.वि. मदनपुर में पर्यवेक्षक मानकुवर वि.ख. ओडगी में शा.उ.मा.वि. खोड़ में पर्यवेक्षक पीली चौहान विख प्रतापपुर में शा.उ.मा.वि. करसी में संरक्षण अधिकारी सुश्री प्रियका सिंह एवं पर्यवेक्षक संतोषी सिंह के द्वारा बाल संरक्षण से संबंधित विषय पर कार्यक्रम करते हुए स्कूली बच्यो को जानकारी प्रदान कि गई।

आज का कार्यक्रम में शा.उ.मा.वि. बसदेई में जिला बाल सरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल के द्वारा बताया गया कि आज के समय में बाल विवाह करना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है इसे रोकना होगा हमें छत्तीसगढ़ राज्य को बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत जिला एवं राज्य बनाना है 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की एवं 21 वर्ष से कम उम्र की लडका का विवाह होना यह बाल विवाह की श्रेणी में आता है अधिकतर देखा जाता है की प्रायः जब लड़का या लडकी पढ़ाई छोड देते हैं या फिर किसी लडकी के लिए कोई बड़े घर का रिश्ता आता है तो घर वाले उसकी शादी कम उम्र में ही कर देते है या करने के लिए तैयार हो जाते हैं और उनका विवाह कर देते हैं कम उम्र में विवाह होने से जो लड़की अपने ससुराल जाती है उसकी ससुराल में जाकर कई तरह के काम करने पड़ते हैं पढ़ने और खेलने की उम्र में उसके ऊपर कई तरह की जिम्मेदारिया डाल दी जाती है जैसे पूरे परिवार का खाना बनाना कपडे धोना, बर्तन धोना, साफ सफाई करना एवं इसके अलावा सास ससुर की सेवा के साथ-साथ पति की भी सेवा करनी पडती है जो बालिका अभी खुद ही बच्ची रहती है उसके ऊपर इतने सारे जिम्मेदारिया का बोझ डाल दिया जाता है एवं उसके अलावा कम उम्र में ही मां बन जाती है कम उम्र में मां बनना जोखिम से भरा होता है मां बच्चे दोनों की जान को खतरा रहता है दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है आगे उनका बच्च्त्वा कुपोषित हो जाता है एवं मा कमजोर हो जाती है समय से पहले कई गभीर बीमारियो से ग्रसित हो जाती है इसके अलावा यदि बच्चे को कुछ हो जाता है तो ससुराल पक्ष के द्वारा बालिका को ताना दिया जाता है कि बालिका को कोसा जाता है इस तरह से बालिका का पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है और जो लड़के होते हैं इन पर भी कम उम्र में विवाह होने से घर की जिम्मेदारी आ जाती है जिसका निर्वाह करने में सक्षम नहीं होते है और कई तरह के आर्थिक परेशानियों का सामना करना पडता है

इसलिए लड़का एय लडकी दोनों विवाह की उम्र के बाद ही विवाह करना चाहिए पढ़ाई करके अपने आप को योग्य बनना चाहिए यदि किसी के कम उम्र में विवाह होने की जानकारी होती है तो तुस्त इसकी सूचना देनी चाहिए अपने क्षेत्र के आगनबाडी कार्यकर्ता पुलिस थाना परियोजना कार्यालय, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी एवं महिला बाल विकास विभाग सूरजपुर में दे सकते हैं इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1098 महिला हेल्पलाइन नंबर 181, इमरजेंसी नंबर 112 में दे सकते हैं

बाल विवाह का राकन के लिए मुख्य कानून बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 है यह अधिनियम बाल विवाह को प्रतिबंधित करता है जिसमें किसी पुरुष के 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष से कम आयु विवाह करना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है

बाल विवाह को जो व्यक्ति संपन्न करता है आयोजित करता है और उसमें नाग लेने वाले समस्त लोग रिश्तेदार पंडित बाराती पक्ष के लोग जो भाग लेते हैं या शामिल होते हैं उसे कठोर कारावास एवं जुर्माना दोनी का सामना करना पडता है इसमें दो वर्ष तक की सजा और एक लाख जुर्माने तक की सजा हो सकती है सूरजपुर जिले में पिछले सत्र में 65 बाल विवाह एवं इस वर्ष 35 बाल विवाह रोके गए है जो की चिंतनीय विषय है।

उक्त कार्यक्रम में सखी सेन्टर में केन्द्र समन्वयक विनिता सिन्हा, मिशन सशक्तिकरण से जिला समन्वयक शारदा सिंह एवं चाईल्ड लाईन से जनार्दन यादव उपस्थित रहे। आज क कार्यक्रम सूरजपुर जिले के सभी विद्यालयों में 1331 छात्राए उपस्थित रही। जिनको बाल संरक्षण से संबंधित विषय पर जानकारी प्रदान कि गई।

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