रेंगती न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था: 13 महीने बाद भी जांच अधूरी , पटवारी बिना नक्शा पहुंचे ।

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गरीब की फरियाद को रौंदती व्यवस्था … पढ़े पूरी खबर…!

रायगढ़। राजस्व और प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। ग्राम साल्हेपाली निवासी संतोषी बैरागी ने बीते 21 मई 2024 को कलेक्टर जनदर्शन में शासकीय भूमि पर बाउंड्रीवाल कर दरवाजा लगाकर अतिक्रमण करने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन आज 13 महीने बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला सका है। अब एक साल बाद शिकायत की जांच के लिए राजस्व विभाग से पटवारी तो भेजा गया मगर न तो नक्शा पूर्ण था, न ही ईमानदार मंशा। इसलिए पटवारी ने विवाद भूमि बात कर अपना पल्ला झड़ने हेतु पंचनामा बनाया है।

ज्ञात हो कि 21 मई 2024 को जनदर्शन दी गई शिकायत में उल्लेख है कि आवेदिका के मकान के अवागमन मार्ग, शासकीय शौचालय, एवं पानी नाली को बंद कर दिया गया है और साथ ही उनके घर के टीन के छज्जे को तोड़ने और कन्हैया पटेल द्वारा शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 273/2/ख में अतिक्रमण कर बाउंड्रीवाल कर दरवाजा लगा दिया गया है जिस भूमि पर शासकीय पानी टंकी और शासकीय विद्युत ट्रांसर्फमर लगा हुआ है, उक्त सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है। उन्होंने इन निर्माण कार्यों के नाम पर सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन शासन-प्रशासन ने 13 महीने तक इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। और कार्यवाही न होने से गांव के दबंग कांग्रेसी नेताओं के हौंसले बुलंद है।

गौरतलब हो कि आवेदिका के परिवार से गांव के दबंगों द्वारा पूर्व में मारपीट भी की गई थी जिसकी उसे और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। दबंग से विवाद के चलते उन्होंने गांव छोड़ दिया है और न्याय की आश में पिछले 2 साल से बेघर महिला अपने परिवार सहित सारंगढ़ में किराए के मकान पर रह रही है। इस बीच आज 21 जुलाई 2025 को पटवारी जांच के लिए गांव पहुंचा, परंतु नक्शा अधूरा होने के कारण मौके पर सीमांकन नहीं हो सका। जबकि पंचनामा में यह दर्ज किया गया कि भूमि विवाद के कारण जांच किसी अन्य पटवारी द्वारा कराई जानी चाहिए। पीड़िता का आरोप है कि यह केवल औपचारिकता निभाने जैसी कार्रवाई थी, जिससे अब न्याय की उम्मीद भी कमजोर पड़ रही है।

न्याय की उम्मीद भी अब टूटने लगी है…
संतोषी बैरागी जैसी महिलाएं जब अपनी जमीन, पानी और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष करती हैं, तब शासन की निष्क्रियता और सिस्टम की सुस्ती उन्हें हताश कर देती है। उनकी शिकायत को 13 महीने बाद भी पूरा समाधान नहीं मिलना भारत की रेंगती न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की दुखद सच्चाई है।

जब तक नहीं होगी कार्रवाई , तब तक ये सवाल तने रहेंगे…
क्या आम आदमी की शिकायतों का कोई मूल्य नहीं?… क्यों महीनों बाद भी जांच अधूरी है?… कब तक गरीब महिलाओं की आवाज़ पंचनामा में दबती रहेगी?…

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