

**कोरबा/बिलासपुर **
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और राजस्व न्यायालय से पक्ष में फैसला आने के बाद कुर्मी क्षत्रिय समाज अब आक्रामक मुद्रा में आ गया है। वर्षों से लंबित भूमि विवाद मामले में कानूनी जीत हासिल करने के बाद समाज ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और विवादित भूमि को खाली कराने की मांग की है।
बिलियन पब्लिक स्कूल की वैधता पर संदेह
कुर्मी क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष आर.के. वर्मा ने विवादित भूमि पर संचालित हो रहे “बिलियन पब्लिक स्कूल” की वैधानिक अनुमति पर कड़े सवाल उठाए हैं। समाज का आरोप है कि जिस भूमि पर वर्षों से मालिकाना हक का विवाद चल रहा था, वहां स्कूल का संचालन किस आधार पर किया जा रहा है? उन्होंने प्रशासन से स्कूल की मान्यता और भूमि उपयोग की अनुमति की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
- सुरक्षा मानकों और अवैध निर्माण का आरोप
- समाज द्वारा जारी बयान में परिसर के भीतर हो रही गतिविधियों पर भी चिंता जताई गई है:
- भारी वाहनों का जमावड़ा: स्कूल बसें और अन्य भारी वाहन दिन-रात परिसर में खड़े रहते हैं, जिससे सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
- बिना अनुमति निर्माण: समाज का दावा है कि परिसर में बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के एक विशाल भवन खड़ा कर लिया गया है। साथ ही, नियमों को ताक पर रखकर एक नया प्रवेश द्वार (गेट) भी तैयार किया गया है। धार्मिक और महापुरुषों की प्रतिमाओं का अपमान
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब समाज ने आरोप लगाया कि परिसर में स्थापित बजरंग बली की मूर्ति और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को क्षति पहुंचाई गई है। इस कृत्य से कुर्मी समाज के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
1985 से जुड़ा है सामाजिक इतिहास
विवादित भूमि कुर्मी समाज के लिए केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर है। समाज के अनुसार:
- वर्ष 1985 से यह स्थान सामाजिक कार्यक्रमों का केंद्र रहा है।
- यहाँ प्रतिवर्ष सरदार पटेल, डॉ. खूबचंद बघेल और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती उत्साहपूर्वक मनाई जाती रही है। प्रमुख मांगें और आंदोलन की चेतावनी
कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति ने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन से मांग की है कि:
- विवादित भूमि को तत्काल प्रभाव से खाली कराया जाए।
- उक्त भूमि का कब्जा “सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति संस्थान” संचालित समिति को सौंपा जाए।
समाज ने चेतावनी दी है कि यदि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई में देरी होती है, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या वह न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करा पाता है या नहीं।
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