आदिवासी मुख्यमंत्री, आदिवासी संसद, आदिवासी कृषि मंत्री व स्थानीय महिला बाल विकास मंत्री होने के बावजूद आदिवासी समाज के आम नागरिक और अधिकारी सुरक्षित नहीं!

Chattisgarh Surajpur

सूरजपुर से बड़ी खबर – डॉक्टरों के अपहरण व बर्बर पिटाई से आदिवासी समाज व चिकित्सा विभाग में आक्रोश

छत्तीसगढ़, जो देश का आदिवासी बाहुल्य राज्य माना जाता है, यहां की पहचान उसकी 42 से अधिक जनजातियां, विशिष्ट संस्कृति व प्राकृतिक जीवनशैली से है। इस राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं। सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महाराज, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम व भटगांव विधानसभा विधायक व कैबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े भी आदिवासी समाज से हैं।

लेकिन सवाल यह है कि जब इतने बड़े पदों पर आदिवासी नेता बैठे हैं, तो फिर आदिवासी समाज के आम नागरिक व अधिकारी ही सुरक्षित क्यों नहीं?

ताजा मामला सूरजपुर जिले के भैयाथान क्षेत्र का है।
जानकारी के अनुसार, 07 जुलाई 2025 की रात 10 से 11 बजे के बीच सीएचसी भैयाथान के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र कंवर (5-6 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं) व डॉ. अभिषेक नामदेव अपनी ड्यूटी खत्म कर हाउसिंग बोर्ड भैयाथान स्थित निवास लौट रहे थे।

इसी दौरान उनके घर के बाहर अज्ञात लोगों द्वारा दोनों डॉक्टरों को अगवा कर बिजली ऑफिस भैयाथान के पास एक कमरे में ले जाया गया, जहां जातिगत गालियां देते हुए बेरहमी से उनकी पिटाई की गई। दोनों डॉक्टरों को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि वे बेहोश हो गए।
घटना के बाद से न केवल दोनों डॉक्टर, बल्कि पूरा चिकित्सा विभाग दहशत में है। सवाल उठता है कि जब डॉक्टर जैसे अधिकारी सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिकों और कर्मचारियों का क्या होगा?

सर्व आदिवासी समाज व चिकित्सा विभाग में उबाल
घटना की जानकारी मिलते ही सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि व चिकित्सा विभाग संघ सक्रिय हो गए हैं। दोनों संगठनों ने कड़ा रोष जताते हुए प्रशासन से मांग की है कि दोषियों पर एससी-एसटी एक्ट समेत कड़ी धाराओं में तत्काल कार्रवाई की जाए।

चेतावनी – नहीं हुई कार्रवाई तो होगा बड़ा आंदोलन
सर्व आदिवासी समाज सूरजपुर व चिकित्सा विभाग संघ सूरजपुर ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में देरी या पक्षपात हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।

अब सवाल ये है:
➡️ क्या आदिवासी मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री इस मामले में सख्त कदम उठाएंगे?
➡️ क्या डॉक्टरों को न्याय मिलेगा?
➡️ क्या आदिवासी समाज की सुरक्षा केवल राजनीति तक सीमित है?

पूरे प्रदेश की निगाहें अब सूरजपुर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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