देवी अहिल्या बाई होलकर की जयंती पर स्वामी आत्मानंद विद्यालय बतरा में हुए विविध कार्यक्रम

Chattisgarh Surajpur

महेश कुमार ठाकुर/ब्यूरो चीफ/VOC.24…

सूरजपुर/बतरा/VOC.24…/ कार्यालय कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक समग्र शिक्षा सूरजपुर के निर्देशानुसार , जिला शिक्षा अधिकारी सह जिला परियोजना अधिकारी समग्र शिक्षा सूरजपुर के मार्गदर्शन में भैयाथान विकासखंड के ग्राम बतरा में स्थित पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में देवी
अहिल्याबाई होलकर की जयंती पर विविध कार्यक्रम आयोजित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के अध्यक्ष हीरालाल राजवाड़े थे।
मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य में बताया कि
भारत के इतिहास में कई ऐसी वीरांगनाएं हुईं जिन्होंने अपने अद्वितीय शासन और दूरदर्शिता से इतिहास के पन्नों और कहानियों में अमिट छाप छोड़ी। इन्हीं में से एक थीं मालवा की देवी अहिल्या बाई होलकर। उन्हें आज भी एक आदर्श प्रशासिका, न्यायप्रिय शासिका और धर्मपरायण महिला के रूप में याद किया जाता है।
अहिल्या बाई होलकर केवल एक शासिका नहीं थीं, वे धर्म, न्याय, सेवा और स्त्री शक्ति का प्रतीक भी थीं।
इस अवसर पर विद्यालय में भाषण, कहानी लेखन, निबंध लेखन, चित्रकला प्रतियोगिता एवं वाद विवाद सहित अन्य प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्रों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।
देवी अहिल्या बाई होलकर के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए विद्यालय के प्राचार्य गोवर्धन सिंह ने बताया कि देवी अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 में महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मनोकजी शिंदे ग्राम पटेल थे। अहिल्याबाई धनगर समुदाय से ताल्लुक रखती थीं। जिस दौर में स्त्रियों को घर की चार दीवारी में रखा जाता था, उस समय अहिल्या बाई को पढ़ने लिखने का अवसर मिला जो असाधारण था।

एक किसान परिवार में जन्मी बालिका अहिल्याबाई को जब मालवा के शासक मल्हार राव होलकर ने देखा तो उन्हें अपने पुत्र खांडेराव होलकर की बहू के रूप में चुन लिया।

नारी शक्ति की मिसाल

उन्होंने एक महिला होकर उस दौर में शासन चलाया जब स्त्रियों को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार भी नहीं था। अपनी बुद्धिमत्ता, करुणा और नेतृत्व क्षमता से उन्होंने नारी सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण पेश किया। देवी अहिल्याबाई ने राज्य को मजबूत करने के लिए अपने नेतृत्व में महिला सेना की स्थापना की। अहिल्याबाई ने स्त्रियों को उनका उचित स्थान दिया। अहिल्या ने लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई को विस्तार देने का प्रयास किया।

कार्यक्रम के अंत में सम्मिलित प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि तथा प्राचार्य द्वारा पुरस्कृत भी किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्राचार्य सहित
संकुल समन्वयक लालसाय राजवाड़े ,प्रधान पाठिका अंजना जायसवाल, शिक्षक अमजद अली ,रामकुमार, आंचल आर्मो सहित अभिभावक गण एवं छात्रों का सराहनीय योगदान रहा।

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