रायपुर | बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में ‘स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन छत्तीसगढ़’ (संबद्ध: इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन) द्वारा एक विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। “संविधान, लोकतंत्र और पत्रकारिता” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने वर्तमान परिदृश्य में पत्रकारिता की चुनौतियों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संविधान: सामाजिक न्याय की आधारशिला
मुख्य वक्ता एस.के. पासवान ने संविधान की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय संविधान महज एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की नींव है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक नागरिक संविधान के मूल्यों को आत्मसात नहीं करेंगे, तब तक लोकतंत्र पूर्ण रूप से सशक्त नहीं हो पाएगा।
लोकतंत्र और पारदर्शिता की चुनौतियां
पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल मतदान नहीं, बल्कि निरंतर जवाबदेही और जनभागीदारी है। उन्होंने वर्तमान समय में लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता को एक बड़ी चुनौती बताया और इस दिशा में मीडिया की भूमिका को निर्णायक बताया।
ग्रामीण पत्रकारिता और हाशिए की आवाज
ग्रामीण पत्रकारिता पर विचार व्यक्त करते हुए मनजीत कौर ने कहा कि ग्रामीण पत्रकार ही लोकतंत्र की जमीनी हकीकत को सामने लाते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की मीडिया तक हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज पहुंचाना पत्रकारों का नैतिक कर्तव्य है। वहीं, डॉ. नंदन ने डॉ. अंबेडकर के समतामूलक समाज के सपने को आज के समय में और अधिक प्रासंगिक बताया।
पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह
व्याख्यानमाला के दौरान संगठन की मजबूती के लिए पदाधिकारियों को शपथ दिलाई गई। इसी क्रम में शुभम् वर्मा ने कोषाध्यक्ष पद की गरिमामयी शपथ ली। कार्यक्रम की शुरुआत नन्ही अरुणिमा शर्मा के गीतों के साथ हुई।
प्रमुख उपस्थित:
संगठन के संरक्षक दिवाकर मुक्तिबोध की अध्यक्षता में संपन्न इस कार्यक्रम में निम्नलिखित गणमान्य उपस्थित रहे:
- दिलीप कुमार साहू (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, IJU)
- पी.सी. रथ (प्रदेश अध्यक्ष)
- अजीत कुमार शर्मा (उपाध्यक्ष), रेणु तिवारी “नंदी”, कृष्णा गोस्वामी
- जयदास मानिकपुरी (प्रदेश मीडिया प्रभारी)
- विनीता मंडल, सैयद सलमा, रूमा सेन गुप्ता, संतोष राजपूत एवं अन्य जिला पदाधिकारी।
निष्कर्ष:
वक्ताओं ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे बौद्धिक विमर्श समाज में संवैधानिक जागरूकता फैलाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
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