सूरजपुर 2 मई 2025 ।फायर सेफ्टी को लेकर सरकारी दफ्तरों में लापरवाही इस हद तक बढ़ चुकी है कि अब जोखिम उठाकर कर्मचारी खुद ही आग बुझाने को मजबूर हैं। शुक्रवार शाम सूरजपुर के जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब मनरेगा और ग्रामीण बैंक के संयुक्त भवन की छत से अचानक धुआं उठने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सबसे पहले मनरेगा कार्यालय की ओर से उठी। बिजली के तारों में चटकने की आवाज़ सुनाई दी और कुछ ही देर में छत से लपटें उठने लगीं। फायर अलार्म नदारद थे, अग्निशमन यंत्र कहीं दिखे ही नहीं, और तो और कर्मचारियों को आग से निपटने का कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था।
इसके बावजूद कर्मचारियों ने हिम्मत नहीं हारी। जैसे-तैसे आग पर काबू पाया गया। दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन जब तक टीम पहुंचती, तब तक कर्मचारी जोखिम उठाकर आग बुझा चुके थे। आपकों बताते चलें कि सरकारी इमारतों में आग लगना अब आम बात हो गई है। जिला पंचायत के डाटा सेंटर में लगी आग की घटना को अभी कुछ ही दिन बीते हैं, और अब यह दूसरी बड़ी चूक सामने आई है। सवाल ये है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद फायर सेफ्टी के बुनियादी इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे…?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि किसी भी कर्मचारी को फायर सेफ्टी ट्रेनिंग तक नहीं दी गई है। न कोई मॉक ड्रिल होती है, न आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी। यह साफ दर्शाता है कि व्यवस्थाएं सिर्फ कागज़ों पर चल रही हैं। बहरहाल
इस बार तो कर्मचारियों की सूझबूझ से जानमाल का नुकसान टल गया, लेकिन कब तक किस्मत भरोसे रहेंगे सरकारी सिस्टम…? ज़रूरत है ठोस कार्रवाई और जवाबदेही की। अब दोहरी नीति पर कब-तक अंकुश लगेगा यह आने वाले दिनों में खुद ही बयां करेगा।
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