अम्बिकापुर। शहर के देवीगंज रोड पर एक बार फिर ट्रैफिक पुलिस की मनमानी उजागर हुई है। मामला एक ग्रैंड विटारा कार (CG15EA9666) का है, जिसे गाड़ी मालिक ने महज़ 2 मिनट के लिए रोड के साइड में पार्क कर रखा था। किसी जरूरी काम से गाड़ी से बाहर निकले ही थे कि ट्रैफिक पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बिना किसी चेतावनी के गाड़ी को लॉक कर दिया।
जब वाहन मालिक ट्रैफिक पुलिस ऑफिस पहुंचे, तो शुरुआत में उन्हें ₹300 का चालान बताया गया। लेकिन जैसे ही उन्होंने चालान भरने की बात कही, तो मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी लालमन सिंह ने चालान की रकम ₹500 बता दी — और वो भी सरकारी पोर्टल या ऑफिस में नहीं, बल्कि अपने पर्सनल खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया।
यह रकम सरगुजा टाइम्स के बैंक खाते से UTR नंबर 695370950518 के माध्यम से भेजी गई — जो कि साफ तौर पर एक गैरकानूनी और भ्रष्टाचार से भरा हुआ कदम है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चालान की सरकारी प्रक्रिया और पोर्टल उपलब्ध हैं, तो पुलिसकर्मी द्वारा निजी खाते में रकम ट्रांसफर करवाना किस कानून के तहत आता है? क्या अब चालान भी “किसी की जेब” तय करेगी?
इस घटना ने न सिर्फ ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनता का भरोसा भी डगमगा दिया है।
क्या प्रशासन लेगा संज्ञान? क्या दोषी ट्रैफिक कर्मी पर होगी कार्रवाई?
अब देखना यह होगा कि सिस्टम इस भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कदम उठाता है।
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