
सूरजपुर, । कुदुरगढ़ महोत्सव के समापन दिवस पर आज एक अविस्मरणीय दृश्य उपस्थित हुआ, जब पामगढ़ के प्रतिभाशाली मल्लखंब खिलाड़ियों ने अपनी कला का ऐसा जादुई प्रदर्शन किया कि दर्शक दंग रह गए। खिलाड़ियों ने खंभे पर योग की दुर्लभ मुद्राएँ, संतुलन के करतब और साहसिक आसनों की एक के बाद एक प्रस्तुति देकर महोत्सव के अंतिम दिन को यादगार बना दिया।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने उद्बोधन में मल्लखंभ खिलाड़ियों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे पारंपरिक खेल न केवल शारीरिक बल और मानसिक एकाग्रता का विकास करते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सेतु बनते हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि शासन पारंपरिक खेलों के संवर्धन और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा ने भी इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि कुदुरगढ़ महोत्सव का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि इस पावन धरती की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और खेल परंपराओं को एक मंच पर जीवंत करना है। उन्होंने कहा कि पामगढ़ के मल्लखंभ खिलाड़ियों ने महोत्सव के समापन को वास्तव में स्वर्णिम बना दिया।
मल्लखंभ — जो भारत की प्राचीन पारंपरिक खेल विधाओं में से एक है — में योग, कुश्ती और कलाबाजी का अनूठा संगम होता है। पामगढ़ के इन युवा खिलाड़ियों ने इस विधा में अपनी महारत का परिचय देते हुए यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी पारंपरिक खेलों को जीवंत रखने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। उनके प्रत्येक करतब पर उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत मे जिला स्तरीय वॉलीबाल और कबड्डी प्रतियोगिता के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टीम और प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।

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