बिश्रामपुर/कोरिया | प्रदीप राजवाड़े
भारतीय राजनीति के इतिहास में 6 अप्रैल का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना हुई थी। मात्र 2 सांसदों से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने तक पहुँच चुका है।
अटल जी की भविष्यवाणी और संघर्ष का दौर
स्थापना दिवस के अवसर पर पार्टी अपने संघर्षमय इतिहास को याद कर रही है। शुरुआती दौर में जब अटल बिहारी वाजपेयी ने नेतृत्व संभाला, तब उन्होंने मुंबई के समुद्र तट पर एक ऐतिहासिक भविष्यवाणी की थी—
“अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।”
80 के दशक में संगठन निर्माण और 90 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा ने पार्टी की वैचारिक नींव को मजबूत किया, जिसने आगे चलकर भाजपा को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।
मोदी युग और ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य
21वीं सदी में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र के साथ देश की राजनीति में नई दिशा दी।
स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी ने ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प दोहराया है। देशभर में 10 लाख से अधिक बूथों पर पार्टी का झंडा फहराया जा रहा है, जो इसके मजबूत संगठनात्मक ढांचे को दर्शाता है।
कोरिया में उत्साहपूर्ण आयोजन
ग्राम पंचायत कोरिया में भी भाजपा का 46वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। स्थानीय कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
बुझन सिरदार, माया दास, चंदेश्वर सारथी, कंच राजवाड़े, नोहर राजवाड़े, प्रदीप राजवाड़े, भीखम राम, तिलकधारी, रामा सिरदार और धन साय।
निष्कर्ष
भाजपा की 46 वर्षों की यात्रा केवल चुनावी सफलता की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और परिपक्वता का प्रतीक भी है। ‘फर्श से अर्श’ तक पहुँची यह पार्टी अब आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में अग्रसर है।
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