
सूरजपुर/vocg.24…/जैसे ही हिंदू त्योहारों की शुरुआत होती है, मूर्तिकार मूर्तियों को बनाना शुरू कर देते हैं। विशेष रूप से, गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के लिए, मूर्तिकार मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस और अन्य सामग्रियों से देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाते हैं। इन त्योहारों के दौरान, ये मूर्तियां घरों, पंडालों और मंदिरों में स्थापित की जाती हैं।
मूर्तिकारों का काम: मूर्तिकार,हमारे तरफ आमतौर पर कलकत्ता से आते हैं और कई जगह मूर्तियां बनाते है।लेकिन इस वर्ष पहली बार कलकत्ता से आए मूर्तिकार हमारे सूरजपुर जिला के उचड़ीह(सूरजपुर रोड रेल्वे फाटक) के पास मूर्तिकार रोहित सोनी मो नम्बर 7542847955 से संपर्क कर के ऑडर भी दे सकते हैं। जो की ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आकर्षक कृष्ण जी की,गणेश जी और दुर्गा मां की मूर्तियां देखने को मिल रही हैं। त्योहारों से महीनों पहले मूर्तियों को बनाना शुरू कर देते हैं. वे विभिन्न आकारों और आकृतियों में देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाते हैं, जैसे कि गणेश, दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, और अन्य। मूर्तिकार अपनी कला और कौशल का उपयोग करके मूर्तियों को सुंदर और आकर्षक बनाते हैं। मूर्तियों को बनाने के लिए, वे मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस, बांस, पुआल, और अन्य सामग्रियों का उपयोग करते हैं। मूर्तियों को बनाने के बाद, उन्हें रंगीन किया जाता है और सजाया जाता है।
त्योहारों में मूर्तियों का महत्व:मूर्तियां हिंदू धर्म में देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और त्योहारों के दौरान उनकी पूजा की जाती है।मूर्तियां भक्तों को देवताओं के साथ जुड़ने और उनकी पूजा करने का एक माध्यम प्रदान करती हैं।मूर्तियां त्योहारों के दौरान वातावरण में उत्साह और खुशी लाती हैं।मूर्तियां धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती हैं, और वे त्योहारों का एक अभिन्न अंग हैं।
मूर्तिकारों के सामने चुनौतियां:मूर्तिकारों को अक्सर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें मूर्तियां बनाने के लिए कर्ज लेना पड़ता है।मूर्तियों को बनाने में बहुत समय और मेहनत लगती है।मूर्तिकारों को त्योहारों के दौरान कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि उन्हें समय पर मूर्तियां बनानी होती हैं।कभी-कभी, मूर्तियां नहीं बिकती हैं, जिससे मूर्तिकारों को नुकसान होता है।
निष्कर्ष:मूर्तिकार हिंदू त्योहारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे अपनी कला और कौशल का उपयोग करके मूर्तियों को बनाते हैं, जो त्योहारों के दौरान पूजा और उत्सव का एक अभिन्न अंग हैं। हालांकि, उन्हें अक्सर वित्तीय और अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

